G7 सम्मेलन 2026: भारत G7 का सदस्य नहीं है, फिर भी हर साल मंच पर क्यों मौजूद रहता है?

By Romanus Topno

Published on: June 17, 2026

G7 सम्मेलन 2026: भारत G7 का सदस्य नहीं है, फिर भी हर साल मंच पर क्यों मौजूद है?
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G7 सम्मेलन 2026 फ्रांस के Évian-les-Bains में तीन दिन का सम्मेलन आयोजन 15 जून से 17 जून तक किया गया। जब भी G7 शिखर सम्मेलन की चर्चा होती है, एक सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है — भारत तो इस समूह का सदस्य ही नहीं है, फिर हर साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सम्मेलन में क्यों दिखाई देते हैं? यह सवाल जायज़ है, और इसका जवाब भारत की बदलती वैश्विक भूमिका और G7 की अपनी रणनीतिक ज़रूरतों, दोनों में छिपा है।

G7 आखिर है क्या?

What is the G7? (in Hindi)
What is the G7? (in Hindi)

G7 यानी “ग्रुप ऑफ सेवन” दुनिया के सात सबसे बड़े औद्योगिक देशों — कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका — का एक अनौपचारिक मंच है, जिसमें यूरोपीय संघ भी हिस्सा लेता है। यह कोई संधि-आधारित संगठन नहीं है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और कूटनीति से जुड़े मुद्दों पर साझा रुख बनाने के लिए बना एक मंच है। 

भारत स्पष्ट रूप से इस सात-देशों के समूह का हिस्सा नहीं है — न इसे कोई वोटिंग अधिकार है, न औपचारिक सदस्यता।

G7 सम्मेलन 2026 — कहाँ हो रहा है?

G7 सम्मेलन 2026 — कहाँ हो रहा है?
G7 सम्मेलन 2026 — कहाँ हो रहा है?

G7 सम्मेलन की अध्यक्षता हर साल किसी न किसी सदस्य देश के पास होती है। इस वर्ष G7 सम्मेलन 2026 की  ज़िम्मेदारी फ्रांस को सौंपी गई है, जो स्विट्ज़रलैंड सीमा के निकट बसे खूबसूरत शहर एवियाँ-ले-बाँ (Évian-les-Bains) में 52वें G7 शिखर सम्मेलन की मेज़बानी कर रहा है।

भारत भले ही इस संगठन का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन विश्व मंच पर भारत की बढ़ती साख और प्रभाव को देखते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस सम्मेलन में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह निमंत्रण सहर्ष स्वीकार करते हुए एवियाँ में कदम रखा और सम्मेलन में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।

भारत G7 में क्यों मौजूद रहता है?

भारत G7 में क्यों मौजूद रहता है?
भारत G7 में क्यों मौजूद रहता है?

जवाब एक शब्द में है — “आमंत्रित सहयोगी” या “आउटरीच पार्टनर”। मेज़बान देश हर साल अपनी पसंद से कुछ गैर-सदस्य देशों को विशेष आमंत्रण भेजते हैं, और भारत पिछले कई वर्षों से इस सूची में लगातार शामिल रहा है। 2026 के सम्मेलन के लिए फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्वयं प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित किया। यह लगातार आठवां G7 सम्मेलन है जिसमें भारत को बुलाया गया है, और यह सिलसिला 2003 के G8 सम्मेलन (जो उस समय भी एवियां में ही हुआ था) से शुरू हुआ था।

भारत को बार-बार न्योता क्यों मिलता है?

इसके पीछे कई ठोस वजहें हैं:

दुनिया की सबसे बड़ी आबादी और तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होने के कारण भारत को अनदेखा करना अब किसी भी वैश्विक मंच के लिए मुश्किल हो गया है। G7 जैसे पश्चिमी देशों के समूह के लिए यह ज़रूरी हो गया है कि वह सिर्फ अपने सदस्यों तक सीमित न रहे, बल्कि गैर-पश्चिमी ताकतों से भी जुड़ाव बनाए — और भारत इसके लिए सबसे स्वाभाविक विकल्प बनता है।

भारत है गरीब देशों का आवाज 

इसके अलावा, भारत को “ग्लोबल साउथ” —यानी विकासशील और गरीब देशों की आवाज़ —माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस भूमिका को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है, यह कहते हुए कि G7 में भारत न सिर्फ अपनी बात रखेगा, बल्कि ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को भी आवाज़ देगा।

यह भी ग़ौर करने वाली बात है कि भारत अकेला आमंत्रित देश नहीं है। 2026 के सम्मेलन में ब्राज़ील, दक्षिण कोरिया, केन्या जैसे देशों को भी बुलाया गया, जबकि चीन — जिसे 2003-2009 के दौर में G8 के आउटरीच कार्यक्रम में शामिल किया जाता था — अब इस सूची से बाहर है। यानी G7 अब चुन-चुनकर उन्हीं देशों को बुलाता है जिनके साथ वह सामरिक और आर्थिक साझेदारी मज़बूत करना चाहता है, और मौजूदा भू-राजनीतिक माहौल में चीन की जगह भारत वह भूमिका निभा रहा है।

भारत के लिए इसका क्या मतलब है?

इस मंच पर मौजूदगी भारत के लिए भी कम फायदेमंद नहीं है। यह न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत की बढ़ती अहमियत को दर्शाता है, बल्कि उसे दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों के नेताओं के साथ सीधे संवाद का मौका भी देता है। आर्थिक सुरक्षा, सप्लाई चेन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताएं रखने का यह एक महत्वपूर्ण मंच बन जाता है। साथ ही, यह भारत की उस छवि को भी मज़बूत करता है जो उसे एक स्थिर लोकतंत्र और तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में पेश करती है।

निष्कर्ष

संक्षेप में कहें तो भारत G7 का सदस्य नहीं है, फिर भी भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी G7 सम्मेलन 2026 में शामिल हुए हैं। भविष्य में भारत इस समूह का सदस्य बनेगा या नहीं, यह निश्चित नहीं है, क्योंकि यह समूह मूल रूप से दुनिया के सबसे विकसित औद्योगिक देशों के लिए बनाया गया था। लेकिन एक रणनीतिक “आउटरीच पार्टनर” के रूप में भारत की लगातार मौजूदगी यह दर्शाती है कि वैश्विक शक्ति संतुलन कैसे बदल रहा है। यही कारण है कि G7 जैसे पारंपरिक पश्चिमी मंच भी अब भारत जैसी उभरती शक्तियों को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते।

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