आप सबको पता ही होगा कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई 28 फरवरी को इज़राइल और अमेरिका द्वारा किए गए हमले में मार गिराए गए थे। ईरानी सूत्रों के अनुसार खामेनेई का अंतिम संस्कार अब 9 जुलाई को तय किया गया है — यानी मृत्यु के पूरे 132 दिन बाद। इस खबर ने लोगों के मन में एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है: इतने लंबे समय तक उनका अंतिम संस्कार क्यों नहीं हो पाया? आइए इस लेख में समझते हैं कि आखिर इसके पीछे क्या कारण हैं।
खामेनेई की मौत कब और कैसे हुई?

सूत्रों के अनुसार अयातुल्लाह अली खामेनेई अपने आवास पर ही थे जब उन्हें निशाना बनाया गया। 28 फरवरी को मिसाइल हमले में उनकी मौत हो गई। वे किसी छिपी हुई जगह में नहीं, बल्कि अपने परिवार के साथ अपने ही आवास में मौजूद थे। समय बीतने के साथ बहुत से लोग यह बात भूल भी चुके थे, लेकिन जब ईरानी मीडिया की रिपोर्ट में यह सामने आया कि उनका जनाज़ा यानी अंतिम संस्कार 9 जुलाई को होगा, तो सब लोग हैरान रह गए।
खामेनेई का अंतिम संस्कार देरी की मुख्य वजह
सूत्रों के मुताबिक, खामेनेई का अंतिम संस्कार में 132 दिन लगने के पीछे एक नहीं, बल्कि कई कारण हैं।
जारी युद्ध:
ईरान और इज़राइल-अमेरिका के बीच युद्ध लंबे समय तक चलता रहा, जिसकी वजह से अंतिम संस्कार को टालना पड़ा।
सुरक्षा कारण:
तीस साल तक देश पर शासन करने वाले सुप्रीम लीडर को आखिरी विदाई देने के मौके पर सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंताएं थीं, और यह भी देरी की एक बड़ी वजह बना।
बड़ा फ्यूनरल जुलूस:
ईरान चाहता था कि अपने सुप्रीम लीडर को सम्मान देने के लिए एक बड़ा और भव्य अंतिम संस्कार जुलूस निकाला जाए। लेकिन युद्ध के बीच इतने बड़े आयोजन को सुरक्षित तरीके से कर पाना मुमकिन नहीं था, इसलिए इसे टालते-टालते इतना समय निकल गया, ताकि जब हालात सही हों तब यह यात्रा ठीक से हो सके।
धार्मिक कैलेंडर भी एक वजह:
अंतिम संस्कार पहले मुहर्रम महीने की शुरुआत में, यानी जून की शुरुआत में, रखने की योजना थी। लेकिन इसे आगे टाल दिया गया ताकि लोग पहले इमाम हुसैन की याद में मनाई जाने वाली वार्षिक अशूरा शोक परंपरा निभा सकें, और उसके बाद ही खामेनेई काअंतिम संस्कार किया जाए।
खामेनेई का अंतिम संस्कार कब और कहां होगा?
ताज़ा जानकारी के अनुसार, तेहरान में इमाम खोमैनी प्रेयर ग्राउंड पर 4 और 5 जुलाई को विदाई समारोह आयोजित किए जाएंगे, इसके बाद 6 जुलाई को तेहरान में अंतिम संस्कार जुलूस निकाला जाएगा। 7 जुलाई को क़ोम शहर में एक अलग समारोह होगा। और अंत में 9 जुलाई को उनके होमटाउन मशहद में आखिरी संस्कार समारोह होगा, जहां इमाम रज़ा दरगाह में उन्हें दफनाया जाएगा।
भारी भीड़ की आशंका

रिपोर्ट्स के मुताबिक खमेनेई के अंतिम संस्कार में करीब 2 करोड़ (20 मिलियन) लोगों के जमा होने की आशंका जताई जा रही है। अफगानिस्तान, पाकिस्तान, इराक, भारत और कश्मीर से भी लोगों ने शामिल होने का वादा किया है। तेहरान के मेयर ने कहा कि राजधानी में इतनी बड़ी भीड़ का कोई अब तक कोई ऐतिहासिक रिकॉर्ड नहीं है।
हालांकि 20 मिलियन की यह भीड़ मुख्यतः 4-5 जुलाई की तेहरान सेरेमनी के लिए अनुमानित है।
2020 में कासिम सुलेमानी के जनाजे में भगदड़ से 56 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इसी पुरानी घटना को ध्यान में रखते हुए 9 जुलाई को मशहद में होने वाले अंतिम दफन में सुरक्षा कारणों से भीड़ सीमित रखी गयी है।
इस्लामी रीति-रिवाज़ क्या कहते हैं?
इस्लामी परंपरा के अनुसार, किसी भी मृत व्यक्ति को जितनी जल्दी हो सके — आम तौर पर 24 घंटों के भीतर — दफनाया जाना चाहिए। हालांकि कुछ अपवादात्मक परिस्थितियों में, जैसे मृत्यु को लेकर अनिश्चितता हो या जान बचाने की कोई चिंता हो, अंतिम संस्कार को कई दिनों के लिए टाला जा सकता है।
खामेनेई का अंतिम संस्कार के मामले में देरी की वजहें इन धार्मिक अपवादों से नहीं, बल्कि युद्ध, सुरक्षा और राजनीतिक हालातों से जुड़ी हुई नज़र आती हैं। यही कारण है कि यह मामला धार्मिक परंपरा और राजनीतिक मजबूरियों के बीच के टकराव के तौर पर भी देखा जा रहा है।
गौर करने वाली बात यह भी है कि इतने बड़े पैमाने पर अंतिम संस्कार जुलूस निकालने की योजना कुछ-कुछ वैसी ही है जैसी 2020 में कासिम सुलेमानी के अंतिम संस्कार के समय देखी गई थी।
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