क्या आप जानते हैं कि असम में अब सबके लिए एक ही कानून होगा — चाहे धर्म कोई भी हो? जी हाँ! UCC Bill Assam 2026 को 27 मई 2026 को असम विधानसभा में 126 सदस्यों के समर्थन से पास किया गया। यह बिल विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप के लिए एक समान कानूनी ढांचा लाएगा। उत्तराखंड और गुजरात के बाद असम यह ऐतिहासिक कदम उठाने वाला देश का तीसरा राज्य बन गया है। आइए, इस बिल के बारे में विस्तार से जानते हैं।
UCC क्या है?

UCC का फुलफॉर्म Uniform Civil Code है। हिंदी के भाषा के अनुसार इसे समान नागरिक संहिता कहते हैं। दरअसल, यह भारत में एक ऐसा प्रस्ताव है जो सभी नागरिकों के लिए — चाहे वो किसी भी धर्म या लिंग के हों — एक समान व्यक्तिगत कानून लागू करने की बात करता है।
आज भारत में कई समुदायों के personal laws उनके धार्मिक ग्रंथों पर आधारित हैं। इसी वजह से अलग-अलग धर्मों में अलग-अलग नियम हैं। उदाहरण के तौर पर — कुछ धर्मों में एक से अधिक विवाह की अनुमति है, तो कहीं संपत्ति सिर्फ बेटों को मिलती है, बेटियों को नहीं। वहीं कुछ जगहों पर संपत्ति बेटे और बेटी दोनों को समान रूप से मिलती है।
UCC इन्हीं धार्मिक कानूनों की जगह एक unified कानून लाना चाहता है। यानी देश के हर नागरिक के लिए — धर्म और लिंग से परे — एक ही कानून लागू होगा।
UCC Bill Assam 2026 की मुख्य बातें
असम सरकार ने हाल ही में 27 मई 2026 को असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा के नेतृत्व में 126 सदस्यों के समर्थन से UCC Bill पारित किया है। UCC Bill Assam 2026 के तहत असम के सभी नागरिकों चाहे वो किसी भी सम्प्रदाय से हो, सब के लिए एक ही कानून लागु किया जायेगा, जो नीचे दिए गए हैं।
बहुविवाह और द्विविवाह पर प्रतिबंध:
UCC Bill के अनुसार सभी नागरिकों के लिए एक ही विवाह करना अनिवार्य है। बहुविवाह या द्विविवाह करने वाले व्यक्ति को भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत दंडित किया जाएगा।
विवाह की आयु/वर्ष:
शादी के लिए कम से कम 21 वर्ष लड़के के लिए और 18 वर्ष लड़की के लिए होना जरूरी है।
अनिवार्य पंजीकरण:
सभी विवाहों और तलाकों का पंजीकरण अनिवार्य हो जाएगा और दंपतियों को विवाह के 60 दिनों के भीतर विवाह ज्ञापन प्रस्तुत करना होगा। इस विफलता के कारण दंपति को दंड और जुर्माना भरना पड़ेगा।
Live-in-relationship का पंजीकरण:
UCC Bill Assam 2026 के ताहेत Live-in-relationship का पंजीकरण एक महीने के भीतर कराना अनिवार्य कर दिया गया है। इस तरह के रिश्ते से पैदा हुए बच्चे वैध या कानूनी संतान माने जाएंगे।
तलाक के मामले में समान आधार:
UCC के इस विधेयक के तहत तलाक के लिए सभी समुदायों के लिए समान आधार निर्धारित किए गए हैं। तलाक मानसिक क्रूरता, परित्याग और आपसी सहमति जैसे कारणों के आधार पर लिया जा सकता है।
यह विधेयक यह भी प्रावधान करता है कि विवाह बंधन को समाप्त करने के लिए किसी व्यक्ति को विवश करना या कोई गैरकानूनी शर्त लगाना दंडनीय अपराध माना जा सकता है।
सभी को समान अधिकार:
यूसीसी (UCC) विधेयक परिवार के सभी सदस्यों को संपत्ति पर समान अधिकार प्रदान करता है। चाहे पत्नी हो, बेटा हो या बेटी, सभी को संपत्ति में समान हिस्सेदारी का अधिकार मिलेगा। इस प्रकार यह विधेयक उत्तराधिकार और संपत्ति के मामलों में समानता सुनिश्चित करता है।
बाल विवाह पर सख्ती:
यूसीसी विधेयक बाल विवाह करने या करवाने वालों के खिलाफ कड़े दंड का प्रावधान करता है। एक उचित विवाह के लिए लड़का का उम्र 21 साल और लड़की की 18 साल होना अनिवार्य है। इस बिल के तहत बिना कानूनी अनुमति के बाल विवाह कराना एक दंडनीय अपराध माना जाएगा।
विधेयक यह भी स्पष्ट करता है कि किसी भी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध विवाह करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। जबरन विवाह करवाना कानून के तहत दंडनीय अपराध होगा।
ST को UCC Bill से छूट

यह विधेयक असम के अधिकांश नागरिकों पर लागू होगा, लेकिन अनुसूचित जनजातियों (ST) को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। अर्थात UCC के प्रावधान अनुसूचित जनजातियों पर लागू नहीं होंगे।
यह छूट उन्हें भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त विशेष संवैधानिक संरक्षण के तहत दी गई है।
अस्वीकरण: यह लेख इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर लिखा गया है। इसमें त्रुटियां हो सकती हैं। इस लेख का उद्देश्य केवल जानकारी प्रदान करना है।
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