तमिल फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज एक्टर और फिल्ममेकर Bharathiraja का 10 जून 2026 को निधन हो गया। उनके निधन से फिल्म इंडस्ट्री को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। उनका निधन चेन्नई में उनके रेजिडेंस में हुआ। वे 84 साल के थे। इस महान फिल्ममेकर को श्रद्धांजलि देने के लिए तमिल फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े एक्टर और पॉलिटिशियन एकत्र हुए। तमिलनाडु के हाल ही में बने सीएम विजय थालापति भी इस दिग्गज को श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
कैसे हुआ Bharathiraja का निधन?

पिछले साल 27 दिसंबर 2025 को बीमार होने के कारण उन्हें एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सा अधिकारियों ने उनके स्वास्थ्य को स्टेबल कंडीशन में बताया था। इंडस्ट्री के कई बड़े एक्टर और एक्ट्रेस ने उनसे मुलाकात की और उनका हाल जाना।
परंतु बहुत लंबे समय से दिल की बीमारी से लड़ते-लड़ते तमिल फिल्म इंडस्ट्री के इस दिग्गज एक्टर और फिल्म डायरेक्टर ने आज 10 जून 2026 को अपने चेन्नई के घर में अंतिम सांस ली।
कौन थे Bharathiraja?

Bharathiraja को इंडियन सिनेमा के बेहतरीन डायरेक्टर के रूप में जाना जाता है। वे एक आइकॉनिक इंडियन फिल्ममेकर, एक्टर और स्क्रीनराइटर थे, जिन्होंने तमिल फिल्म इंडस्ट्री में बहुत बड़ा बदलाव लाया। उन्होंने फिल्म की शूटिंग को स्टूडियो से बाहर निकालकर प्राकृतिक परिवेश में लाया और नेचुरल शूटिंग को फिल्म का हिस्सा बनाया। उनके फिल्मी करियर ने करीब 50 साल का सफर तय किया।
Bharathiraja का फिल्म इंडस्ट्री में सफर
Bharathiraja का जन्म 1941 में अलिनाग्राम, थेनी में हुआ था। उन्हें बचपन से ही गांव के थिएटर और साहित्य में गहरा लगाव था।
वे बचपन में ही चेन्नई चले गए ताकि अपने अभिनेता बनने के सपने को पूरा कर सकें। किंतु सपने को पूरा करने से पहले उन्हें पेट्रोल पंप पर काम करना पड़ा, जिससे वे अपना गुजारा चला सकें। वहीं उनकी दोस्ती मशहूर संगीतकार Ilaiyaraaja से हुई, जिनके साथ उन्होंने एक छोटा कैमरा भी साझा किया करते थे। आगे चलकर इलैयाराजा बहुत बड़े म्यूज़िशियन बने और दोनों की दोस्ती और भी गहरी होती गई।
आखिरकार उन्हें असिस्टेंट डायरेक्टर का काम मिला और उन्होंने फिल्म की भाषा कन्नड़ के मास्टर फिल्ममेकर पुट्टन्ना कनगल से सीखी।
आगे चलकर उन्होंने तमिल फिल्म इंडस्ट्री में बड़े बदलाव लाए। उन्होंने फिल्म की शूटिंग को स्टूडियो से निकालकर प्रकृति के साथ जोड़ा। और उनकी इसी डायरेक्टिंग स्टाइल ने उन्हें इंडियन फिल्म इंडस्ट्री के श्रेष्ठ डायरेक्टर के रूप में स्थापित किया।
CM Vijay ने दी श्रद्धांजलि
तमिलनाडु के सीएम Vijay Thalapathi, legendary फिल्ममेकर और अभिनेता Bharathiraja को श्रद्धांजलि देने के लिए उनके चेन्नई स्थित घर नीलांकराई पहुंचे। वे बेहद भावुक हो उठे।
उन्होंने ट्विटर पर लिखा —
“तमिल सिनेमा इंडस्ट्री के दिग्गज डायरेक्टर और एक्टर के निधन से मैं बहुत दुखी हूं। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री को बहुत बड़ी पहचान दिलाई और फिल्म को स्टूडियो से बाहर निकालकर रियल लोकेशन और गांव के लोगों तक पहुंचाया। वे एक बहुत ही सफल और यूनिक डायरेक्टर थे।”
तमिल फिल्म इंडस्ट्री और पॉलिटिशियन की श्रद्धांजलि

साउथ फिल्म इंडस्ट्री की कई हस्तियों ने इस दिग्गज डायरेक्टर और एक्टर के निधन पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
कई लोगों ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं साझा कीं —
Chiranjeevi ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि इंडियन फिल्म इंडस्ट्री ने अपने सबसे बड़े स्टोरीटेलर्स में से एक को खो दिया।
Prakash Raj ने X पर पोस्ट किया —
“I miss you, darling. Thank you for the inspiration and love for cinema. May your soul rest in peace.”
Bharathiraja के पॉपुलर सिनेमा और अवॉर्ड
Bharathiraja एक ऐसे डायरेक्टर थे जिनकी अलग डायरेक्शन स्टाइल के कारण उन्हें तमिल और इंडियन सिनेमा के बेस्ट डायरेक्टर्स में गिना जाता है। उनके द्वारा बनाई गई कई फिल्में उनके जीवन की मास्टरपीस बन गईं। उन्होंने अपने फिल्म डायरेक्शन के दम पर बहुत सारे अवॉर्ड हासिल किए।
उन्हें कुल 6 नेशनल अवॉर्ड मिले, जो निम्नलिखित फिल्मों के लिए दिए गए —
तेलुगु बेस्ट फीचर फिल्म “Seethakoka Chilaka” (1981) — नेशनल फिल्म अवॉर्ड से सम्मानित
- तमिल बेस्ट फीचर फिल्म “Muthal Mariyathai” (1986)
- “Vedham Pudhithu” (1988) — सामाजिक मुद्दों पर बेस्ट फीचर फिल्म
- “Karuththamma” (1995) — फैमिली वेलफेयर के लिए बेस्ट फीचर फिल्म
- “Anthimanthaarai” (1996) — तमिल में बेस्ट फीचर फिल्म
- “Kadal Pookkal” (2001) — बेस्ट स्क्रीनप्ले
- इसके अलावा उन्हें 4 Filmfare Awards South, 6 Tamil Nadu State Film Awards और Nandi Award भी मिले।
सबसे बड़ी बात यह है कि भारत सरकार ने उन्हें 2004 में पद्म श्री से सम्मानित किया।
निष्कर्ष
Bharathiraja केवल एक एक्टर या डायरेक्टर नहीं थे। उन्होंने भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में एक क्रांति लाई। उन्होंने फिल्ममेकिंग को स्टूडियो से बाहर निकालकर गांव और प्राकृतिक परिवेश तक पहुंचाया, जिससे सिनेमा में नेचुरल दृश्य आए। इसीलिए उन्हें बेस्ट डायरेक्टर के रूप में याद किया जाएगा। उनका जाना इंडियन फिल्म इंडस्ट्री, विशेषकर तमिल फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक अपूरणीय क्षति है।