Amol Muzumdar — घरेलू क्रिकेट का वो सितारा जिसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान नहीं मिली — आज भारतीय क्रिकेट का सबसे चर्चित चेहरा बन चुका है। भारतीय महिला क्रिकेट टीम के कोच के रूप में उन्होंने एक ऐसा सपना साकार किया है जिसे पूरा होने में दशकों लग गए।
गुमनामी की परछाइयों से निकलकर वैश्विक चमक तक का सफर, मजूमदार ने दिन-रात मेहनत करके तय किया — सिर्फ एक लक्ष्य के लिए: भारत को वो बहुप्रतीक्षित वर्ल्ड कप ट्रॉफी दिलाना। और 2025 में, वो सपना आखिरकार हकीकत बन गया।
Amol Muzumdar का प्रारंभिक जीवन
Amol Muzumdar का जन्म 11 नवम्बर 1974 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बी.पी.एम. हाई स्कूल से प्राप्त की। बाद में उनके कोच रमाकांत आचरेकर के सुझाव पर उन्होंने सरदाश्रम विद्यालय में प्रवेश लिया। यह वही विद्यालय था जहाँ कई महान क्रिकेटरों ने अपनी प्रतिभा को निखारा।
यहीं पर अमोल मजूमदार की मुलाकात उस समय के युवा खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर से हुई, जो आगे चलकर ‘क्रिकेट के भगवान’ कहलाए। दोनों के गुरु एक ही थे और दोनों ने एक साथ प्रशिक्षण प्राप्त किया। यह कहना गलत नहीं होगा कि यह ईश्वर की ही योजना थी — एक शिष्य ने पुरुष क्रिकेट में इतिहास रचा, जबकि दूसरा, अमोल मजूमदार, आगे चलकर भारतीय महिला क्रिकेट टीम को 48 वर्षों बाद विश्व कप जिताने वाला महान कोच बना।
Amol Muzumdar Cricket Journey | क्रिकेट सफर
Amol Muzumdar Cricket Journey ने अपने प्रथम श्रेणी क्रिकेट करियर की शानदार शुरुआत की। उन्होंने मुंबई की ओर से 1993–94 के रणजी ट्रॉफी सत्र में हरियाणा के खिलाफ फरीदाबाद में पदार्पण किया और अपनी पहली ही पारी में 260 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली। यह किसी भी खिलाड़ी द्वारा प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण के समय बनाया गया विश्व रिकॉर्ड था, जो दिसंबर 2018 में अजय रोहरा द्वारा तोड़ा गया।
इस शानदार प्रदर्शन के बाद मजूमदार को 1994 में इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय अंडर-19 टीम का उपकप्तान नियुक्त किया गया। उस समय उन्हें देश के सर्वश्रेष्ठ युवा खिलाड़ियों में से एक माना जाता था। इसके अलावा उन्होंने 1994–95 के सत्र में भारत ए टीम के लिए राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली के साथ भी खेला।
हालांकि अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन और निरंतरता के बावजूद अमोल मजूमदार को भारतीय राष्ट्रीय टीम में खेलने का अवसर कभी नहीं मिला। जहाँ उनके समकालीन खिलाड़ी जैसे सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, वहीं मजूमदार को टेस्ट या वनडे मैच खेलने का मौका नहीं मिला। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और मुंबई क्रिकेट टीम के लिए लगातार योगदान देते रहे। वर्ष 2007 में उन्होंने रणजी ट्रॉफी में मुंबई के लिए सर्वाधिक रन बनाए
सितंबर 2009 में, मुंबई टीम में चयन न होने पर उन्होंने असम की ओर से सैयद मुश्ताक अली टी-20 ट्रॉफी में हिस्सा लिया। इसके बाद उन्होंने विभिन्न राज्यों और क्लबों के लिए खेलते हुए अपने क्रिकेट करियर को आगे बढ़ाया।
भारतीय क्रिकेट टीम को छूट देने का कारण
जब हम क्रिकेट इतिहास पर नज़र डालते हैं, तो यह स्पष्ट होता है कि अमोल मजूमदार जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय मैचों में खेलने का अवसर नहीं मिला। अपने समय के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ों में गिने जाने के बावजूद उन्हें भारतीय राष्ट्रीय टीम में चयन का सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ। इसके पीछे के कारण आज तक स्पष्ट रूप से सामने नहीं आए हैं। यह एक ऐसा रहस्य बना हुआ है कि आखिर क्यों मजूमदार, जो लगातार घरेलू क्रिकेट में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे थे, को टीम इंडिया की जर्सी पहनने का मौका नहीं दिया गया।
रिकॉर्ड के अनुसार, उनके सभी समकालीन साथी — जैसे सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली — अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेले और भारतीय क्रिकेट की गौरवगाथा में अपना नाम दर्ज कराया, जबकि मजूमदार को टेस्ट और वनडे जैसे राष्ट्रीय मैचों से भी दूर रखा गया। इन सब परिस्थितियों से निराश होकर उन्होंने अंततः भारतीय क्रिकेट टीम से दूरी बना ली और विभिन्न राज्यों की टीमों के लिए छोटे स्तर के खेलों में हिस्सा लेना शुरू किया। फिर भी, उनका खेल के प्रति समर्पण और धैर्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहा।
Amol Muzumdar as Coach |कोच के रूप में भूमिका
खेल के मैदान पर अपने शानदार प्रदर्शन के बाद Amol Muzumdar ने कोचिंग के क्षेत्र में कदम रखा और अपनी उत्कृष्ट क्रिकेट समझ तथा अनुभव से कई टीमों को नई दिशा दी। उन्हें सबसे पहले भारत की अंडर-19 और अंडर-23 क्रिकेट टीमों का बल्लेबाज़ी कोच नियुक्त किया गया, जहाँ उन्होंने युवा खिलाड़ियों की तकनीक और मानसिक दृढ़ता पर विशेष ध्यान दिया। दिसंबर 2013 में मजूमदार को नीदरलैंड क्रिकेट टीम के लिए बल्लेबाज़ी सलाहकार (Batting Consultant) के रूप में नियुक्त किया गया, जहाँ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपने कोचिंग कौशल का प्रदर्शन किया।
वर्ष 2018 में अमोल मजूमदार को आईपीएल टीम राजस्थान रॉयल्स का बल्लेबाज़ी कोच बनाया गया। उन्होंने लगातार तीन सत्रों तक टीम को अपनी सेवाएँ दीं और आज भी उनके साथ जुड़े हुए हैं। इसके अलावा, दक्षिण अफ्रीका की क्रिकेट टीम जब भारत दौरे पर आई, तब उन्हें उस टीम का बल्लेबाज़ी कोच नियुक्त किया गया, जिससे उनका कोचिंग अनुभव और भी समृद्ध हुआ। वर्तमान में वे मुंबई क्रिकेट टीम के मुख्य कोच के रूप में कार्यरत हैं।
अक्टूबर 2023 में बीसीसीआई ने Amol Muzumdar को भारतीय महिला क्रिकेट टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया। उनके मार्गदर्शन और कड़ी मेहनत के परिणामस्वरूप भारतीय महिला टीम ने 2025 में 48 वर्षों के लंबे इंतज़ार के बाद विश्व कप जीतकर इतिहास रच दिया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने अमोल मजूमदार को भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल और सम्मानित कोचों में शुमार कर दिया।
अस्वीकरण: यह लेख इंटरनेट पर उपलब्ध विभिन्न जानकारियों पर आधारित है। इसमें त्रुटियाँ हो सकती हैं। इस लेख का उद्देश्य जानकारी प्रदान करना है और किसी की भावना को ठेस पहुँचाना नहीं है।
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