करुणानिधि की प्रतिमा नुकसान की खुलासा : 77 साल ENT डॉक्टर निकला आरोपी

By Romanus Topno

Published on: July 19, 2025

karunanidhi defaced statue
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तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि की प्रतिमा को 15 जुलाई की सुबह सलेम जिले के फोर रोड क्षेत्र स्थित अन्ना पार्क में अज्ञात व्यक्तियों द्वारा क्षतिग्रस्त कर दिया गया। यह घटना उस समय सामने आई जब प्रतिमा पर काले रंग का पेंट फेंका गया, जिससे सार्वजनिक रूप से आक्रोश फैल गया। यह मूर्ति करुणानिधि की राजनीतिक विरासत और उनके योगदान की स्मृति स्वरूप लगाई गई थी। करुणानिधि की प्रतिमा को इस प्रकार नुकसान पहुंचाना न केवल कानून व्यवस्था की चुनौती है, बल्कि सामाजिक शांति पर भी एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि दोषियों की पहचान की जा सके। अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस घटना के पीछे कौन लोग हैं या उनका मकसद क्या था। इस घटना पर DMK पार्टी के कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने नाराजगी जताई है और आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है। प्रतिमा को साफ कर पुनः स्थापित कर दिया गया है, लेकिन यह घटना एक बड़ी राजनीतिक और सामाजिक बहस का कारण बन गई है।

77 वर्षीय डॉक्टर निकला आरोपी

करुणानिधि की प्रतिमा पर काले रंग का पेंट फेंकने की घटना में पुलिस जांच के बाद एक 77 वर्षीय बुजुर्ग डॉक्टर को गिरफ्तार किया गया है। यह डॉक्टर एक सेवानिवृत्त ईएनटी (नाक, कान, गला) विशेषज्ञ है। घटना के बाद पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से आरोपी की पहचान की। फुटेज की जांच और पूछताछ के आधार पर उसे हिरासत में लिया गया।

करुणानिधि की प्रतिमा

पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान आरोपी डॉक्टर ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उसने बताया कि पारिवारिक परेशानियों के कारण वह मानसिक तनाव में था और इसी वजह से उसने यह कदम उठाया। फिलहाल, पुलिस यह भी जांच कर रही है कि उसका किसी राजनीतिक संगठन से कोई संबंध है या नहीं। यह मामला इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें आरोपी की उम्र और पेशा ऐसा है जिसकी आम तौर पर किसी अपराध से उम्मीद नहीं की जाती। लेकिन यह दिखाता है कि मानसिक दबाव और व्यक्तिगत समस्याएं कभी-कभी लोगों को असामान्य निर्णय लेने पर मजबूर कर सकती हैं।

करुणानिधि: तमिल राजनीति का एक मजबूत स्तंभ

करुणानिधि की प्रतिमा केवल एक स्मारक नहीं है, बल्कि तमिलनाडु के सामाजिक और राजनीतिक इतिहास की जीवंत प्रतीक मानी जाती है। करुणानिधि का जन्म 3 जून 1924 को थिरुक्कुवलाई, तिरुवारूर जिले में हुआ था, और उनका मूल नाम दक्षिणामूर्ति था। समय के साथ उन्होंने “करुणानिधि” नाम को अपनाया, जो तमिल समाज और राजनीति में उनकी पहचान बन गया। वे एक बहुमुखी व्यक्तित्व थे—एक लेखक, पटकथा लेखक, और एक विचारशील नेता जिन्होंने सामाजिक न्याय और क्षेत्रीय भाषा को प्रोत्साहित करने के लिए कई प्रयास किए।

उन्होंने 10 फरवरी 1969 को पहली बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली और बाद में कुल पाँच बार मुख्यमंत्री बने। उनके नेतृत्व में राज्य ने कई सामाजिक सुधार देखे। उनका कार्यकाल लगभग 18 वर्षों तक चला, जिससे वे राज्य के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मुख्यमंत्री बने। करुणानिधि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) पार्टी के प्रमुख स्तंभ थे और द्रविड़ आंदोलन को मुख्यधारा की राजनीति तक पहुंचाया। उन्होंने निचले वर्गों को सामाजिक अवसर दिलाने, शिक्षा को बढ़ावा देने और तमिल भाषा की गरिमा को संरक्षित करने के लिए कई उल्लेखनीय कार्य किए।

यह हमला केवल एक प्रतिमा को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि एक विचारधारा और सामाजिक चेतना पर हमला माना गया। करुणानिधि आज भी तमिल राजनीति में स्थायित्व, सिद्धांत और सामाजिक न्याय की मिसाल के रूप में याद किए जाते हैं।

अस्वीकरण: यह लेख इंटरनेट से प्राप्त विभिन्न संसाधनों के आधार पर लिखा गया है। इसमें त्रुटियाँ हो सकती हैं। इस लेख का उद्देश्य जानकारी प्रदान करना है, किसी की भावना को ठेस पहुँचाना नहीं।

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